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Showing posts from December, 2018

Best hindi poem- रेल

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           रेल हम भारतीय रेल की रीढ़ की हड्डी,                बरसों खेलें साथ कबड्डी। संचालन बाधित हुई तो,              दोनों की गीली हुई थी चड्डी। पर तेरे ज्ञान के बिना मैं होता,               लोको पायलट आज फिसड्डी। इंजन पे चढ़ना सिखलाया,                 और बताया खाना क्या। अनुभव की वो बात बताई,                 किताबों में जाना क्या। सिग्नल की बारीकी बताई                  गोलाई का आना हैं। रास्ते का ढलान बताया,                   कैसे लौङ चढ़ाना हैं। कहॉ पे कितना नाँच लगेगा,                   कहॉ पे ब्रेक लगाना हैं। स्टेशन के बिल्कुल करीब,                   ...

Best hindi poem- न्यू ईयर

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                     न्यू ईयर अंग्रेज यहाँ से चले गए, मानसिक गुलामी बाँकी हैं। न्यू ईयर जो मना रहे, ये भी उसकी एक झांकी हैं। भारतीय संस्कृति नग्न हुई ऐसे त्योहार मनाने में। माँस, शराब का भोग लगाना क्या रखा इस खाने में। इस देश में अच्छे कार्य यहाँ हिन्दू पंचांग से होती हैं। मुहर्त बिन जो वियाह रचाये ज़िन्दगी भर वो रोती हैं। चैत्र मास के इसी दिवस अपना नव बर्ष आरम्भ हुआ। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा, सृष्टी का जब प्रारंभ हुआ। मधुमास क्या आया खेतों में हरियाली की रौनक छाती हैं, वातावरण में उष्णता बढ़ती पेड़ पौधें मुस्काती हैं। आम की मन को लुभाती खुशबू अंदर तक छा जाती हैं। वसंतदुत भी ऐसे में जब कु-कु कर शोर के मचाती हैं। प्रकृति अपना नव बर्ष यहाँ कुछ इसी तरह मनाती हैं। भारत की वैदिक सभ्यता को हम तार-तार कर बैठे हैं। पुरखों के सब सपनें को हम दाग-दार कर बैठे हैं। ऋषि मुनियों का देश हैं ये मानसिक बेडियाँ तोडों तुम। अंग्रेज यहाँ से चले गए, न्यू ईयर मनाना छोड़ो तुम।             ...

Best hindi poem--NPS

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                   NPS अबकी क्रांति पेंशन वाली होनी बहुत जरुरी हैं। जम्हूरियत के सरदारों को समझाना मजबूरी है।           देश का युवा जगा हुआ हैं,              नेता जी छा जाओ तुम।               Nps को खत्म करो,              सत्ता में पैठ जमाओ तुम।             चार राज्य से शिक्षा लेकर,               जनता को पहचानों तुम।               हम तो तेरे कायल है पर,               हमको भी पहचानों तुम।   Ops पर जुमलेबाजी की सौगात अधूरी हैं, अबकी क्रांति पेंशन वाली होनी बहुत जरूरी हैं।             डिजिटल अब ये देश हो रहा,             हमको मत समझाओ तुम।            ...

Best Patriotic poem-मैं नेता हूँ

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                    मैं नेता हूँ                     *********     मैं नेता हूँ, मेरा क्या मैं देश बेच के खाता हूँ। आत्मा मैंने बेच दिया जनता का भाग्य विधाता हूँ।   लाल किसी के घर पैदा हो दावत खाने जाता हूँ।  लाली कोई जनम जो ले ले उसको मैं मरवाता हूँ।   मंच थाम के जनता में ,बेटी बचाओ चिल्लाता हूँ।      मैं नेता हूँ, मेरा क्या मैं देश बेच के खाता हूँ।    गाँव का छोरा पढ़ने चला सीधी भर्ती करवाता हूँ।   पार्टी का उसे मंत्र पढ़ाकर बरसों वोट मैं पाता हूँ।  स्कूल ,कॉलेज, सड़के बनवाता, खूब कमीशन खाता हूँ।  लच्छेदार मैं भाषण देता, जनता को खूब बनाता हूँ।       मैं नेता हूँ, मेरा क्या मैं देश बेचकर खाता हूँ।   शैल तुङबाता, वन कटबाता भव्य मैं महल सजाता हूँ।    अपने बच्चों के खातिर, बेधर्म भी मेल कराता हूँ।    दूजा जो बेधर्म बियाहे, आपस में लाड़बाता हूँ।   ...

Best Patriotic poem -दिल्ली

        दिल्ली मीर जाफर राजा बन बैठा,     आजादी के बाद में। जयचंदो ने फौज खड़ी की,     दिल्ली के दरबार में।   देश हमारा खूब लूटाथा,     हिन्दी चीनी प्यार में।     धंधे सारे चला रहे थे,                                                            अपने  ही परिवार में।    मीर जाफर राजा बन बैठा,     आजादी के बाद में।   जयचंदो ने फौज खड़ी की,     दिल्ली के दरबार में।   दो लोगों ने मौज किये है,       पूरे इस संसार में।  बाबाओं की धोती बिकती,      धर्म के बाजार में,  नेताओं के छिक हैं मिलते,      रोज नये अखबार में।   मीर जाफ...