Best hindi poem- रेल
रेल हम भारतीय रेल की रीढ़ की हड्डी, बरसों खेलें साथ कबड्डी। संचालन बाधित हुई तो, दोनों की गीली हुई थी चड्डी। पर तेरे ज्ञान के बिना मैं होता, लोको पायलट आज फिसड्डी। इंजन पे चढ़ना सिखलाया, और बताया खाना क्या। अनुभव की वो बात बताई, किताबों में जाना क्या। सिग्नल की बारीकी बताई गोलाई का आना हैं। रास्ते का ढलान बताया, कैसे लौङ चढ़ाना हैं। कहॉ पे कितना नाँच लगेगा, कहॉ पे ब्रेक लगाना हैं। स्टेशन के बिल्कुल करीब, ...