एक दिन बाबा वीर भगत

एक दिन बाबा वीर भगत, सपनों में मेरे आये थे
हिंद की व्यथा बताया और सोते से हमें जगाये थे
इस मिट्टी का कर्ज हैं मुझपे ये समझाने आये थे
ये मुश्किल मानव तन का उद्देश बताने आये थे
लघु जीवन में पा जाए सम्मान सिखाने आये थे
एक दिन बाबा वीर भगत, सपनों में मेरे आये थे
कुछ भारत के लोग यहाँ,गोरों से ज्यादा काले थे
तन था देशी पर नियत से ये तो गंदे नाले थे
कुछ ऐसे भी हुए सपूत जो भारत के मतवाले थे
दोनों की कथा सुना के वो स्वराज सिखाने आये थे
एक दिन बाबा वीर भगत, सपनों में मेरे आये थे
गद्दारों को नहीं बकसना ये भी कहने आये थे
अंग्रेजी में उलझा भारत मात बचाने आये थे
स्वदेशी का मंत्र दिया हमको समझाने आये थे
एक दिन बाबा वीर भगत, सपनों में मेरे आये थे
हिंद की व्यथा बताया और सोते से हमें जगाये थे

                    अनिल कुमार मंडल
                 रेल चालक/ग़ाज़ियाबाद

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